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StyleCraze by Harini Natarajan - 3d ago
Doyou know a particular person who always gets what they want, when they want? Have you been awed by this person’s perseverance, and yet ..read more

सेहतमंद रहने के लिए हमेशा से ही हरी सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी जाती रही है। यह शरीर को कई तरह के लाभ पहुंचाकर स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करती हैं। ऐसी ही एक हरी सब्जी है तुरई। कई लोग इसे खाना पसंद नहीं करते, पर बहुत से लोगों को इसका स्वाद बहुत भाता है। पोषक तत्वों से भरपूर होने की वजह से यह शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। यह एक ऐसी बेल है, जिसका फल, पत्ते, जड़ और बीज सभी लाभकारी हैं (1)। इसी वजह से हम इस लेख में तुरई के बारे में बता रहे हैं। यहां हम तुरई के फायदे के साथ ही अन्य जरूरी जानकारी देंगे। साथ ही अंत में तुरई के उपयोग और संभावित नुकसान के बारे में भी बताएंगे। एक बात का ध्यान रखें कि तुरई लेख में दी गईं बीमारियां का इलाज नहीं है, यह केवल इनके लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है। चलिए, सबसे पहले तुरई के फायदे के बारे में जान लेते हैं। तुरई के फायदे – Benefits of Ridge Gourd (Turai) in Hindi 1. एंटी-इंफ्लामेटरी एंटी-इंफ्लामेटरी प्रभाव तुरई के सूखे पत्तों के इथेनॉल अर्क में पाया जाता है। इस प्रभाव को एडिमा (शरीर के ऊतकों में तरल जमने की वजह से सूजन) और ग्रेन्युलोमा (इंफ्लामेशन) प्रभावित व्यक्तियों पर जांचा गया। शोध में पाया गया कि इथेनॉल अर्क 67.6% और 72.5% एडिमा को कम करने में मदद कर सकता है। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि तुरई एंटी-इंफ्लामेटरी की तरह भी कार्य कर सकती है (1)। माना जाता है कि तुरई के अर्क में पाया जाने वाला एंटी-इंफ्लामेटरी प्रभाव इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स जैसे फ्लेवोनोइड्स, टैनिन और टरपेनोइड्स की वजह से होता है (2)। 2. सिरदर्द के लिए तुरई के फायदे माना जाता है कि तुरई सिर दर्द को भी ठीक करने में मदद कर सकती है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद एक शोध के मुताबिक तुरई के पत्ते और इसके बीज के एथनॉलिक अर्क दर्द को कम करने में सहायक हो सकते हैं। रिसर्च के अनुसार इसमें एनाल्जेसिक और एंटीइंफ्लामेटरी गुण होते हैं। यह दोनों गुण दर्द को कम करने और राहत दिलाने के लिए जाने जाते हैं। रिसर्च में कहा गया है कि लूफा एकटंगुला (तुरई) के दर्द कम करने के उपयोग का समर्थन तो किया जा सकता है, लेकिन मनुष्यों पर अधिक अध्ययन की आवश्यकता है (1)। 3. एंटी-अल्सर तुरई को पेट के अल्सर यानी ग्रेस्ट्रिक अल्सर को कम करने के लिए भी जाना जाता है। इसमें मौजूद गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव प्रभाव कुछ हद तक अल्सर के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। यह प्रभाव सूखे तुरई के गूदे के अर्क के मेथोनॉलिक और पानी के अर्क में पाया जाता है। यह प्रभाव गैस्ट्रिक म्यूकोसा (पेट की एक झिल्ली) के म्यूकोसल ग्लाइकोप्रोटीन के स्तर को ठीक करने में मदद करके अल्सर के लक्षण को कुछ हद तक कम कर सकता है। शोध में पानी के अर्क के मुकाबले तुरई के मेथनॉलिक अर्क को गैस्ट्रिक अल्सर के ठीक होने के प्रक्रिया में ज्यादा मददगार पाया गया है (1)। 4. डायबिटीज के लिए तुरई के फायदे तुरई को पुराने समय से ही डायबिटीज को नियंत्रित करने वाली सब्जी के रूप में जाना जाता है। प्राचीन समय से चली आ रही इस मान्यता को लेकर चूहों पर शोध भी किया गया। इसी संबंध में एनसीबीआई की वेबसाइट पर भी भी एक अध्ययन उपलब्ध है। शोध में कहा गया है कि तुरई के एथनॉलिक अर्क में ग्लूकोज के स्तर को कम करने वाला हाइपोग्लाइमिक प्रभाव पाया जाता है। इसी प्रभाव की वजह से तुरई को डायबिटीज नियंत्रित करने के लिए लाभकारी माना जाता है। अलग-अलग अध्ययन में तुरई के एथनॉलिक, मेथेनॉलिक अर्क और हाइड्रो-अल्कोहलिक को लेकर हुए अध्ययन में यह डायबिटीज को कम करने में प्रभावकारी पाया गया। तुरई को लेकर किए गये शोध ने एंटीडायबिटिक गतिविधि के पारंपरिक उपयोग का समर्थन तो किया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि इसका प्रभाव मनुष्यों में कितना हो सकता है, इसे जांचने के लिए मनुष्यों पर बड़े पैमाने पर अध्ययन किया जाना चाहिए (1)। 5. पेचिश में तुरई के फायदे पेचिश को रोकने में भी तुरई को लाभदायक माना गया है। सालों से तुरई के बीज में मौजूद नरम खाद्य हिस्से को पेचिश से राहत पाने के तरीके के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता रहा है (1)। साथ ही इसके पत्तों को भी पेचिश के लिए लाभकारी माना जाता है (3)। दरअसल, दस्त का गंभीर रूप पेचिश होने की वजह पैरासाइट और बैक्टीरियल इन्फेक्शन होती है। अधिकतर यह समस्या शिगेला (Shigella) नामक ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया (बैक्टीरिया का एक प्रकार) की वजह से होती है (4)। वहीं, तुरई में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण ग्राम नेगेटिव बैक्टिरिया को कुछ हद तक पनपने से रोकने में मदद कर सकता है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि तुरई, पेचिश को कम करने में कुछ हद तक मदद कर सकती है (1)। 6. पीलिया में तुरई के फायदे पीलिया से बचाव के लिए भी तुरई को इस्तेमाल में लाया जाता है। यह स्वास्थ्य समस्या, शरीर में सिरम बिलीरुबिन (Bilirubin) नामक कंपाउंड के बढ़ने की वजह से होती है। साथ ही इसके इलाज के लिए दुनियाभर में तुरई की पत्तियां, तना और बीज को कुचलकर पीलिया के रोगियों को सुंघाया जाता है (5)। इसके साथ ही तुरई और उसके पत्ते के पाउडर का भी उपयोग किया जाता है। दरअसल, इसमें हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण पाया जाता है, जो लिवर को क्षति से बचाता है। यही गुण शरीर में बढ़े हुए सिरम बिलीरुबिन (Serum bilirubin) को कम करने का काम करता है, जिसके कारण पीलिया होता है। तुरई सब्जी के अल्कोहोलिक अर्क से यह कम होता है (1)। इसी वजह से माना जाता है कि पीलिया से राहत पाने में तुरई मदद कर सकता है (6)। 7. एंटी-कैंसर वैसे तो कैंसर का ट्रीटमेंट डॉक्टर ही कर सकता है, परंतु इससे बचाव के कुछ तरीकों को अपनाया जा सकता है। माना जाता है कि तुरई भी उन्हीं तरीकों में से एक है, जो कैंसर से बचाव में मदद कर सकती है। एनसीबीआई में मौजूद चूहों पर किए गए एक शोध में तुरई के मेथानॉलिक और पानी से बने अर्क से ट्यूमर के बनने की गति में कमी दर्ज की गई। वहीं, मनुष्यों पर किए गये शोध के मुताबिक लंग्स कैंसर प्रभावितों पर शोध करने पर भी तुरई में एंटी-कैंसर गुण पाए गये। हालांकि, शोध में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तुरई में एंटी-कैंसर गतिविधि है, यह जानने के लिए पर्याप्त अध्ययन नहीं किए गये हैं, जिस वजह से किसी निष्कर्ष में पहुंचना जल्दबाजी होगी। ऐसे में एंटीकैंसर प्रभाव को लेकर अधिक अध्ययन किए जाने जरूरी है (1)। पाठक ध्यान दें कि तुरई कैंसर का उपचार नहीं है। कैंसर जैसी घातक बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टरी ट्रीटमेंट जरूर करवाएं। 8. कुष्ठ रोग कुष्ठरोग के इलाज के लिए भी तुरई का इस्तेमाल पुराने समय में किया जाता रहा है। माना जाता है कि इसके पत्तों का पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह में लगाने से कुष्ठ रोग को कम करने में मदद मिल सकती है (1)। यह एक तरह का संक्रामक रोग है, जो जीवाणु माइकोबैक्टीरियम लेप्री की वजह से होता है (7)। इस रोग में तुरई का कौन सा गुण मदद करता है यह स्पष्ट नहीं है। साथ ही यह भी ध्यान दें कि इस तरह के रोग के लिए घरेलू उपचार करना चाहें तो जरूर करें, लेकिन डॉक्टर से ट्रीटमेंट भी जरूर करवाएं। 9. दाद में तुरई के फायदे रिंगवॉर्म (दाद) में भी तुरई को लाभदायक माना जाता है। इसकी पत्तियों को पीसकर, दाद प्रभावित जगह पर लगाने से आराम मिलने की बात कही जाती है। दरअसल, रिंगवॉर्म फंगस की वजह से होता है और तुरई में और इसके पत्तों के पानी से बने अर्क में एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि दाद से राहत दिलाने में तुरई मदद कर सकता है (1) (8)। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह कितना प्रभावशाली होता है। तुरई के फायदे के बाद हम इसमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी दे रहे हैं। आगे हम तुरई के उपयोग पर भी चर्चा करेंगे। तुरई के पोषक तत्व – Ridge Gourd Nutritional Value in Hindi इसमें कोई शक नहीं कि तुरई पौष्टिक सब्जियों में से एक हैं। तुरई के स्वास्थ्य लाभ के बारे में हम ऊपर बता ही चुके हैं। अब हम इसमें मौजूद पोषक तत्वों के बारे में बता रहे हैं (9)। पोषक तत्व मात्रा प्रति 100 ग्राम जल 93.85 g ऊर्जा 20 kcal प्रोटीन 1.2 g कुल फैट 0.2 g कार्बोहाइड्रेट 4.35 g फाइबर 1.1 g शुगर 2.02 g मिनरल कैल्शियम 20 mg आयरन 0.36 mg मैग्नीशियम 14 mg फास्फोरस 32 mg पोटेशियम 139 mg सोडियम 3 mg जिंक 0.07 mg कॉपर 0.035 mg मैंगनीज 0.092 mg सेलेनियम 0.2 µg विटामिन विटामिन सी 12 mg थियामिन 0.05 mg राइबोफ्लेविन 0.06 mg नियासिन 0.4 mg पैंटोथेनिक एसिड 0.218 mg विटामिन बी -6 0.043 mg फोलेट, टोटल 7 µg विटामिन ए, IU 410 IU विटामिन ई (अल्फा-टोकोफेरॉल)   0.1 mg विटामिन के (फाइलोक्विनोन) 0.7 g अब हम तुरई का उपयोग किस-किस तरह से किया जा सकता है, यह बता रहे हैं। इसके बाद तुरई खाने के नुकसान के बारे में भी विस्तार से जानेंगे। तुरई का उपयोग – How to Use Ridge Gourd in Hindi तुरई के फायदे जानने के बाद इसके उपयोग के तरीकों को जान लेना भी जरूरी है। तुरई के स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए तुरई का उपयोग कुछ इस तरह से किया जा सकता है: तुरई की सब्जी बनाकर रात या दोपहर के समय खा सकते हैं। इसका आचार भी बनाया जा सकता है। तुरई की बेल में लगने वाले फूल के पकौड़े बनाकर शाम के समय भी खाए जाते हैं। तुरई के सूखे पत्तों के पाउडर का सेवन किया जा सकता है। तुरई के बीज में मौजूद मुलायम गूदा भी खाया जाता है। कुछ लोग तुरई को सूप और कढ़ी में भी इस्तेमाल करते हैं। पूरी तरह से सूख जाने के बाद तुरई का उपयोग लूफा की तरह किया जाता है। तुरई को लेकर अधिकतर शोध चूहों पर ही हुए हैं, इसलिए इसके सेवन की सटीक मात्रा स्पष्ट नहीं है। हां, अस्थमा प्रभावित लोग जूस के तौर पर तुरई का सेवन आधा कप दिन दो बार कर सकते हैं (6)। तुरई का उपयोग जानने के बाद इसके नुकसान के बारे में जानना भी जरूरी है। चलिए, अब तुरई के नुकसान पर एक नजर डाल लेते हैं। तुरई के नुकसान – Side Effects of Ridge Gourd (Turai) in Hindi तुरई के नुकसान से ज्यादा शरीर को फायदे ही होते हैं। सब्जी के रूप में खाए जाने वाली तुरई को लेकर अधिकतर शोध चूहों पर हुए हैं, जिसकी वजह से इसके नुकसान स्पष्ट नहीं हैं। कुछ संभावित तुरई के नुकसान के बारे में हम नीचे बता रहे हैं (1): गर्भावस्था में इसे सुरक्षित नहीं माना जाता है। तुरई से बनी चाय में गर्भपात (Abortifacient) प्रभाव पाया जाता है। इसके सेवन से लोगों को एलर्जी भी हो सकती है। तुरई स्वास्थ्य के लिए कितना लाभकारी है, यह तो आप जान ही गए हैं। सीमित मात्रा में इसके नुकसान स्वास्थ्य के लिए न के बराबर हैं। ऐसे में भले ही इसका स्वाद ज्यादा.. ..read more
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महिला का श्रृंगार लिपस्टिक के बिना अधूरा है और इस बात को आप भी मानती होंगी। यह एक ऐसा प्रोडक्ट है, जो अन्य मेकअप उत्पाद के बिना चेहरे को फ्रेश लुक देने का काम कर सकता है, बशर्ते लिपस्टिक लगाने का तरीका महिलाओं को पता हो। इस बात से आप भी इनकार नहीं कर पाएंगी कि लिपस्टिक लगाना भी एक कला है। ऐसे में स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम लिपस्टिक लगाने का सही तरीका बताने जा रहे हैं, जिससे आप अपने मेकअप और भी आकर्षक बना सकें। इसके साथ ही लेख में लिपस्टिक लगाने से जुड़ी जरूरी सावधानियां भी बताई गईं हैं। तो आइए आपको बताते हैं कि होठों पर लिपस्टिक लगाने का तरीका क्या है। होठों पर लिपस्टिक लगाने का सही तरीका नीचे बताई गईं बातों को ध्यान में रख कर आप लिपस्टिक लगाने का सही तरीका सीख सकती हैं। इसके लिए आपको लिपस्टिक के अलावा कुछ अन्य मेकअप के सामान की भी जरूरत पड़ेगी, जो कुछ इस प्रकार हैं :  सामग्री : लिप बाम लिप लाइनर कंसीलर कॉम्पैक्ट पाउडर आपकी मनपसंद लिपस्टिक अब आगे जानिए होठों पर लिपस्टिक लगाने का तरीका। विधि : 1. होंठो को तैयार करें इस स्टेप में होठों को लिपस्टिक लगाने के लिए तैयार किया जाता है। अगर आपके होंठ सूखे या खुरदुरे हैं, तो लिप स्क्रब की मदद से उन्हें एक्सफोलिएट कर लें और फिर उन पर अच्छी तरह लिप बाम लगा कर मॉइस्चराइज कर लें। आप चाहें तो इसके बाद लिप प्राइमर भी लगा सकती हैं। प्राइमर की मदद से लिपस्टिक ज्यादा देर तक टिकी रहेगी और उसका रंग भी हल्का नही होगा। 2. बेस लगाएं : अगर होठों पर किसी तरह का डिसकलरेशन या पिगमेंटेशन है, तो हो सकता है कि लिपस्टिक का रंग उन पर सही ढंग से न दिखे। ऐसे में, होठों का कालापन दूर करने के लिए उन पर कंसीलर लगाएं। इसे आप उंगलियों या फ्लैट ब्रश की मदद से लगा सकती हैं। ध्यान रखें कि इसे होठों पर रगड़े नहीं बल्कि थपथपा कर लगाएं। साथ ही, इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि कंसीलर का शेड होठों की त्वचा से मेल खाता हो। इसके बाद, आखिरी में थोड़ा सा कॉम्पैक्ट पाउडर लगा कर बेस को पूरा करें। 3. लिप लाइनर लिप लाइनर होठों का शेप सही ढंग से दिखाने में मदद करता है। इसके साथ ही, लिप लाइनर लगाने से लिपस्टिक को होठों के बाहर फैलने से बचाया जा सकता है। इसके लिए अपने ऊपरी होंठ के वी शेप के बीच से शुरुआत करते हुए, पेंसिल को होठों की बाउंड्री पर घुमाएं। कोशिश करें कि पेंसिल ज्यादा शार्प न हो, इससे होंठ पर शेप बनाने में समस्या हो सकती है। साथ ही, इस बात ध्यान रखना भी जरूरी है कि लिप लाइनर लिपस्टिक के कलर का ही हो। उसका रंग लिपस्टिक के शेड से गहरा न हो। 4. लिपस्टिक लगाएं अब समय आ गया है कि सबसे जरूरी प्रोडक्ट उठाने का और वो है लिपस्टिक। आप लिपस्टिक को सीधे  होठों पर लगाने की जगह ब्रश का उपयोग कर सकती हैं। इसके लिए लिपस्टिक से थोड़ा सा लिप कलर ब्रश पर लें और होठों पर लगाना शुरू करें। शुरुआत ऊपरी होठों के वी शेप से करें और फिर धीरे धीरे पूरे होंठों पर लगाएं। पहले एक हल्का कोट लगाएं और फिर अगले कोट की मदद से लिपस्टिक का रंग अपनी आवश्यकतानुसार गहरा करें। ध्यान रखें कि होंठों के सारे कॉर्नर भी अच्छी तरह कवर हो जाएं। 5. फिनिशिंग टच लिपस्टिक लगाने के बाद एक इयरबड की मदद से होठों के आसपास फैली लिपस्टिक को साफ कर लें। लिप्स का शेप बेहतर तरीके से दिखने के लिए आप एक फ्लैट ब्रश की मदद से होठों के आसपास कंसीलर लगा सकती हैं। इसके साथ ही, आप चाहें तो अपने होंठो को एक ग्लॉसी लुक देने के लिए आखिरी में होंठों पर लिप ग्लॉस भी लगा सकती हैं, हालांकि, यह पूरी तरह वैकल्पिक है। आगे जानिए लिप लाइनर के बिना लिपस्टिक लगाने का सही तरीका। लिप लाइनर के बिना लिपस्टिक कैसे लगाएं? अगर आपके पास लिप लाइनर नहीं है, तो घबराने की कोई बात नहीं। उसके बिना भी आप मेकअप आर्टिस्ट की तरह लिपस्टिक लगा सकती हैं। नीचे जानिए लिप लाइनर के बिना होठों पर लिपस्टिक लगाने का तरीका। 1. उंगलियों का करें प्रयोग अगर आपके पास लिप लाइनर नहीं है, तो उंगलियों की मदद से लिपस्टिक लगाने का तरीका अपनाया जा सकता है। लिपस्टिक से थोड़ा सा लिप कलर अपनी उंगलियों पर लें और होठों पर हल्के हाथों से लगाएं। शुरुआत में होठों की अंदरूनी बाउंड्री (Inner Boundry) पर लगाएं। उंगलियों से लगाते समय ध्यान दें कि उन पर लिया गया रंग हल्का हो और होठों पर लगाते समय कोई जल्दबाजी न की जाए। 2. लुक करें पूरा पूरे होठों पर लिपस्टिक आप सीधे लिपस्टिक की मदद से या लिप ब्रश की मदद से लगा सकती हैं। आप चाहें तो पूरे होंठों पर रंग भरने के लिए भी उंगलियों का उपयोग कर सकती हैं। आप यह जान चुके हैं कि लिपस्टिक लगाने का सही तरीका क्या है। आइए, अब आपको कुछ और टिप्स और सावधानियां बताते हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। लिपस्टिक लगाने के कुछ और टिप्स और सावधानियां लिपस्टिक लगाने का सही तरीका जानने के साथ, उससे जुड़ी कुछ सावधानियां बरतना भी जरूरी हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। कभी भी लिपस्टिक के शेड से गहरे शेड के लिपलाइनर का उपयोग न करें। आज कल यह फैशन ट्रेंड में नहीं है। लिपस्टिक लगाने के बाद, लिप लाइनर के साथ उसे अच्छी तरह ब्लेंड कर लें, ताकि दोनों अलग अलग न दिखें। अपने होठों और अवसर के अनुसार लिपस्टिक का रंग और उसका टेक्सचर (मैट, ग्लॉस या क्रीम) चुनें। अतिरिक्त लिपस्टिक को पोंछने के लिए टिश्यू पेपर या इयरबड का उपयोग करें। कपड़े या वेट वाइप्स के उपयोग से बाकी मेकअप खराब हो सकता है। लिपस्टिक लगाने के लिए लिप ब्रश का ही उपयोग करें। इसमें भी एंगुलर ब्रश का उपयोग करना ज्यादा फायदेमंद होगा। लिपस्टिक लगाते समय ध्यान रखें कि वह आपके दांतों पर न लगे। लिपस्टिक खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देख लें। खराब लिपस्टिक के कारण होठों को नुकसान पहुंच सकता है। दुकानों पर रखे टेस्टर पीस का उपयोग सीधे होंठों पर न करें। अगर आपको उन्हें ट्राई करना हो तो उंगलियों पर लिप कलर लेकर करें। फटे होंठों पर लिपस्टिक न लगाएं। इससे फटे होंठों की समस्या और बढ़ सकती है। होंठों पर लिपस्टिक लगाने का तरीका अब आप समझ ही गई होंगी। अगर शुरुआत में लिपस्टिक लगाते समय आपकी लिपस्टिक फैले या सही ढंग से न लगे तो परेशान न हों। किसी भी अन्य कला की तरह यह भी प्रयास के साथ बेहतर होती जाएगी। लेख में बताई गई टिप्स की मदद से आप दूसरों को भी बता सकती हैं कि लिपस्टिक कैसे लगाएं और लिपस्टिक लगाने का सही तरीका क्या है। तो आज ही इन टिप्स की मदद से अपनी मनपसंद लिपस्टिक लगाएं और नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख कर हमे बताना न भूलें कि वो आपके लिए कितनी फायदेमंद रही। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल डार्क लिप्स पर लिपस्टिक कैसे लगाएं? डार्क होंठों पर लिपस्टिक लगाते समय उन पर अच्छी तरह कंसीलर लगाना जरूरी है। जिनके होठों का रंग गहरा है, उन्हें सामान्य से अधिक कंसीलर लगाने की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा, उन्हें लिपस्टिक के भी सामान्य से अधिक कोट लगाने की जरूरत पड़ सकती है। पतले होंठों पर लिपस्टिक कैसे लगाएं? पतले होंठों को शुरुआत में एक्सफोलिएट करना जरूरी हो सकता है। इससे होंठों के ऊपर मृत कोशिकाओं की परत निकल जाती है और वे पूरे दिखने लगते हैं। इसके अलावा, लिप बाम, प्राइमर, लिप लाइनर और लिपस्टिक लगाने के बाद, आखिरी में फ्लैट ब्रश की मदद से कंसीलर लगाना भी जरूरी होता है। इससे होठों का आकार पूरा दिखने लगता है। ताज़े आलेख तुरई के फायदे और नुकसान - Ridge Gourd (Turai) Benefits and Side Effects in Hindi सेहतमंद रहने के लिए हमेशा से ही हरी सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी जाती रही है। यह शरीर को कई तरह के लाभ पहुंचाकर स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करती हैं। जरूरत से ज्यादा ग्रीन टी पीने के नुकसान - Green Tea Side Effects in Hindi भारत में ग्रीन टी पीने का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। अधिकतर लोग ग्रीन टी को स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानते हैं, जो कि काफी हद तक सच भी है। रूखी त्वचा (ड्राई स्किन) के लिए 10 सबसे अच्छे क्रीम - Best Creams for Dry Skin in Hindi क्या आप भी ड्राई स्किन से परेशान हैं? जानिए रूखी त्वचा (ड्राई स्किन) के लिए सबसे अच्छे क्रीमों के बारे में। बदलते मौसम के साथ त्वचा में कई तरह के बदलाव आते हैं, कई बार मेकअप और केमिकल युक्त क्रीम भी त्वचा को रूखा बना देती है। जानिए रूखी त्वचा के लिए कौनसे क्रीम इस्तेमाल करना चाहिए... बाल बढ़ाने के 16 सबसे अच्छे तेल - Best Hair Growth Oils in Hindi 'ये है रेशमी जुल्फों का अंधेरा न घबराइए….', 'ओ हसीना जुल्फों वाली….'। अब आप सोच रहे होंगे कि इन गानों का जिक्र यहां क्यों किया जा रहा है? तैलीय त्वचा (ऑयली स्किन) के लिए 10 बेस्ट फेसवॉश - Oily Skin Ke Liye Face Wash - 10 Best Face Washes for Oily Skin in Hindi अगर आपकी त्वचा तैलीय है तो यहाँ इस लेख में हम आपके लिए लाये है ऑयली स्किन के लिए सबसे अच्छे फेस वाश (Face Washes for Oily Skin in Hindi) जो आपके चेहरे से अतिरिक्त तेल को हटाके आपको एक चमकदार त्वचा दे सकता है... 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