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~Mansi~
I am a versatile blogger, and recently, more into book reviews. I am an e..
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Book Name - How to Be a Likeable Bigot Author - Naomi Datta Publication year - 2019 Pages - 216 Genre - Sarcasm The book is a collection ..read more
~Mansi~ - 2M ago
CAUTION: The content hereafter may damage your optimism, sanity and immaturity. Today I proudly and successfully complete 3 decades of my ..read more
~Mansi~ - 3M ago
Sometimes you look into the mirror and don't recognise the person you see. The tired body, stooping shoulders, greasy hair and a drained ..read more
Book Title: City Of Nine Gates Author:  Pankaj Rajput Edition Language: English Genre: Fiction Pages: 308Firstly, a big thanks to ..read more
Mom is feeding me some paste with something she calls as purple spoon. Yakk, this doesn't taste great. These big people need to ..read more
~Mansi~ - 5M ago
Being the flawless mother, And a sublime partner, A cook, advisor, and a teaser, Crazy and hazy nagger, From the weekend laundry, And ..read more
His rattles spread on the mattress, his soft toy Tuffy lying alone in the corner, his little pants and those wet nappies waiting to be ..read more
We never knew, Your delicate touch, Will make us love you so much, We never knew, You will make our days shorter and nights longer, ..read more
इस लेख का उद्देश्य रीतियों या व्यक्तियों पर नहीं किन्तु नीतियों पर कटाक्ष करना है।प्रिय बदलती हुई सरकार/ पुनः लौटती हुई सरकार,मेरे 4 माह के बेटे की पासपोर्ट अर्ज़ी इसलिए रद्द कर दी गयी क्योंकि मेरे आधार कार्ड में मेरे नाम के साथ अब तक मेरे पिता का नाम जुड़ा हुआ है। मेरा surname शादी के बाद भी मेरे पिता का ही surname है और मैं अब तक सभी सरकारी दस्तावेजों में मैं w/o की जगह d/o से ही जानी जाती हूं। और इसलिए मेरे बेटे के दस्तावेजों को अधूरा करार दिया गया।मैंने सोचा था "मेरा आधार मेरी पहचान" है, किन्तु वर्तमान में घटित घटना से ज्ञात होता है मैं किसकी बेटी या पत्नी हूँ ये मेरी पहचान है। मुझे ना ही अपने साथ अपने पिता का नाम जोड़ने में शर्म आती है और ना ही अपने पति के नाम से जुड़ने में कोई झिझक। तो यह तो मेरी इच्छा पर होना चाहिए ना कि मैं किसका नाम अपने आधार में जोड़ना चाहती हूँ। हालांकि मैं भी मेरे पिता और पति की तरह एक स्वतंत्र करदाता हूँ, लेकिन मेरी अपनी पहचान रखने का मुझे कोई अधिकार नहीं है।वैसे भी मेरे पुत्र के आधार में तो मेरा नाम आना नहीं है, तो उसकी अर्ज़ी रद्द करने का कारण मैं कैसे बन सकती हूँ। हालांकि उसके जन्म के पूर्व, जन्म के समय और जन्म के पश्चात एक माँ के तौर पे जो तकलीफ़ें मैंने सही उनके इनाम स्वरूप मुझे हर मदर्स डे पर एक कार्ड मिल ही जायेगा, आधार या पासपोर्ट का कार्ड नहीं, ग्रीटिंग कार्ड। मेरा बेटा फिर भी मेरे नाम से नहीं जाना जाएगा। वो सिर्फ उसके ननिहाल में उसकी माँ के नाम से जाना जाएगा।इन सब के उपरांत यदि मेरे पिता का नाम मेरे आधार में लिखा भी है तो मैं समझती हूँ कि उसे बदलने का क्या औचित्य है, मैं तो हमेशा मेरे पिता की ही बेटी रहूंगी ना। मेरे अनुसार शादी के ख़र्च में 50 रुपये आधार में "सुधार" के लिए भी जोड़ देने चाहिए। या फिर हमारे देश में जैसे 6 माह का मातृत्व अवकाश होता है वैसे ही "पहचान परिवर्तन" अवकाश भी होना चाहिए जिसमें की हर वैवाहिक महिला अपने सभी पहचान पत्रों में पिता के नाम से जुड़ने की त्रुटि को सुधरवा सके।मेरे पास और लिखने का समय नहीं है। मैं चली अपने आधार, पासपोर्ट, वीसा, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक एकाउंट, पैन कार्ड, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, आफिस रिकॉर्ड,  PF, वोटर पहचान पत्र इत्यादि में "सुधार" करवाने। गनीमत है सोशल मीडिया एकाउंट्स में परिवर्तन अनिवार्य नहीं है। ..read more
My little boy,One day you will tower me,And become smart and clever,One day these moments may fade,You will become a man,And have your own ..read more

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