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Pt. Subhash Shastri is well known and World Famous Astrologer in India wh..
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धुप बहुत सी प्रकार की होती है तंत्रसार के अनुसार सोलह प्रकार की धुप मानी जाती है वो है अगर, तगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागरमाथा, चंदन, इलाइची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गल। इसे षोडशांग धुप कहते है। गुग्गल धुप का उपयोग सुगंध, इत्र एवं औषधि में भी किया जाता है। इसकी महक बहुत मीठी होती है और आग में डालने पर वह स्थान भी सुगंधित हो जाता है। गुरूवार के दिन धुप घर में जलानी चाहिए। आज के लेख में जानिये गुग्गल धुप कौन कौन से फायदे देती है। दिल और दिमाग के दर्द से मिलेगी राहत गुग्गल की धुप की मदद से मस्तिष्क का दर्द और उससे संबंधित सभी प्रकार के रोगों का नाश हो जाता है। दिल के दर्द में भी इसे बहुत लाभदायक माना जाता है। किया कराया मिट जाएगा घर में साफ़ सफाई रखे और पीपल के पत्ते से सात दिन तक घर में गौमूत्र के छींटे मारे एवं तत्पश्चात शुद्ध गुग्गल की धूप जला दे। इससे घर में किसी ने कुछ कर रखा होगा तो वह दूर हो जाएगा। गृह कलह की शान्ति हो हफ्ते में एक बार किसी भी दिन घर में कंडे जलाकर गुग्गल या गुग्गुल की धूनी देने से गृह कलह शांत होते है। अनिद्रा और तनाव से राहत अगर आपको भी किसी भी प्रकार का तनाव है या चिंता है तो गुग्गुल की धुप से राहत मिलेगी। इससे रात में अच्छी नींद भी आती है। पारलौकिक मदद के लिए ऐसा माना जाता है कि इस धुप से पारलौकिक या दिव्य शक्तियां आकर्षित होती है और व्यक्ति को उनसे मदद मिलती है। गुरूवार के दिन किसी भी मंदिर या फिर समाधि पर इसकी धुप लगाए। इस धुप को देवताओं के निमित्त ही देनी चाहिए। जानिये धुप कैसे दे? सबसे पहले एक कंडा जलाए। उसके बाद में जब अंगारे ही रह जाए तब उसके ऊपर गुग्गुल डाल दे। ऐसा करने से पुरे घर में एक सुगंधित धुआं फैल जाएगा। अक्सर यह धूप गुरूवार और रविवार को दी जाती है। Like and Share our Facebook Page. The post जानिये गुग्गुल धूप के चमत्कारी फायदे appeared first on Best Astrology Solution Blog. ..read more

जैसा कि हम सभी जानते है कि भगवान शिव की उपासना करने का समय शाम यानी कि संध्याकाल, धरधरी का समय और प्रदोष काल है। अगर हम बात करे भगवान शिव के दिन की तो सोमवार है और तिथि त्रयोदशी है। वैसे तो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि कहते है। इसका मतलब यह है कि वर्ष में करीबन 12 शिवरात्रि होती है। फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। जानिए महाशिवरात्रि से जुडी हुई कुछ ख़ास बाते: शिवरात्रि को बोधोत्सव माना जाता है। क्योकि जिसमे अपना बोध होता है और हम भी भगवान शिव का ही अंश है और उनके संरक्षण में है। पौराणिक कथाओ के हिसाब से ऐसा माना जाता है कि जिस समय सृष्टि की शुरुआत हुई थी तो इसी दिन आधी रात में भगवान शिव का निराकार से साकार रूप में यानी कि ब्रह्म से रूद्र के रूप में अवतरण हुआ था। ज्योतिषशास्त्र के हिसाब से घर का कौनसा स्थान किस रंग का होना चाहिए? ऐसा ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात आदि देव भगवान श्रीशिव करोड़ों सूर्यों के सामान प्रभा वाले लिंगरूप में प्रकट हुए थे। कौनसे भगवान को चढ़ता है, कौनसा प्रसाद? अगर हम ज्योतिष शास्त्र के माने तो फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि में चंद्रमा सूर्य के नजदीक होता है। यह वह समय है जब जीवनरूपी चंद्रमा का शिवरूपी सूर्य के साथ योग मिलन होता है। इसलिए यह चतुर्दशी को शिवपूजा करने का विधान है। इसी दिन प्रलय की बेला में प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से भस्म कर देते है। यही वजह है जिसकी वजह से इसे महाशिवरात्रि या जलरात्रि कहा जाता है। महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शंकर की शादी भी हुई थी, इसलिए रात को शंकर जी की बारात निकाली जाती है। रात में पूजा करने के बाद में फलाहार किया जाता है। दूसरे दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेल पत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है। Like and Share our Facebook Page. The post महाशिवरात्रि से जुड़े चौका देने वाले रहस्य appeared first on Best Astrology Solution Blog. ..read more

हर देवी देवता के लिए एक विशेष प्रसाद होता है जो उन्हें बहुत पसंद होता है। जानिये यह दिलचस्प जानकारी: श्री गणेश जी: यह बात तो सब जानते है कि गणेश जी को मोदक और लड्डू बहुत अच्छा लगता है। इसके अलावा आप उन्हें बूंदी के लड्डू भी अर्पित कर सकते है। गणेश जी को गन्ने की गडेरी, जामुन, सुखी गरी और गुड़ बहुत ही प्रिय होता है। श्री राम जी: भगवान श्रीराम जी को केसर युक्त खीर बहुत पसंद है और भोजन के साथ में कलाकंद बहुत पसंद है। श्री विष्णु जी: विष्णु जी को किशमिश का भोग लगाना चाहिए। साथ ही में आंवले का भी भोग लगाना बहुत ही शुभ होता है। खीर में सूखे मेवे डालने चाहिए और अंत में तुलसी  जरूर से डाले। इसको पहले उत्तम प्रकार से बनाए और फिर विष्णु जी को  भोग लगाने के बाद में वितरित करे। सुख, शांति पाने के लिए घर का डिज़ाइन रखे वास्तु के अनुसार श्री शिव जी का प्रसाद: श्री शिवजी को भांग और पंचामृत जो कि दूध, दही, शहद, गंगा जल, घी से बनता है और शिवजी को   बहुत पसंद होता है। श्रावण मास में शिवजी का उपवास रखकर उनको गुड़, चना और चिरौंजी के अलावा दूध अर्पित करने से सभी तरह की मनोकामना पूरी होती है। श्री हनुमान जी हनुमान जी को हलुआ, लाल एवं ताजे फल, गुड़ से बने हुए लड्डू, गुड़ धनिया और तुलसी दल अर्पित करते है। शुद्ध देसी घी से बने हुए बेसन के लड्डू भी बहुत पसंद है। श्री लक्ष्मी जी जैसा कि हम जानते है लक्ष्मी जी को धन की देवी माना जाता है। इसके बिना सभी चीजे व्यर्थ है। अगर लक्ष्मी जी को प्रसन्न करना है तो उनके प्रिय पसंदीदा भोग लक्ष्मी मंदिर में जाकर अर्पित करे। लक्ष्मी जी को सफ़ेद एवं पीले रंग के  मिष्ठान बहुत पसंद है। श्री सरस्वती भोग: माता सरस्वती को दूध, पंचामृत, दही, मक्खन, सफ़ेद तिल के लड्डू तथा धान का लावा पसंद है। सरस्वती जी को यह किसी भी मंदिर में जाकर अर्पित करना चाहिए। ज्योतिषशास्त्र के हिसाब से घर का कौनसा स्थान किस रंग का होना चाहिए? श्रीकृष्ण भोग: भगवान श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री का भोग बहुत पसंद है।  श्री दुर्गा जी: देवी दुर्गा को शक्ति की देवी माना जाता है। दुर्गा जी को प्रसाद के रूप में खीर, मालपुए, मीठा हलुआ, केले, नारियल, धान का लावाऔर मिष्ठान बहुत पसंद है।  यदि आप माता के भक्त हैं तो बुधवार और शुक्रवार को पवित्र रहकर माताजी के मंदिर जाएं और उन्हें ये भोग अर्पित करें। श्री काली और भैरव भोग: काली माता और भगवान भैरवनाथ को लगभग एक ही जैसा भोग लगता है। हलुआ, पूरी और मदिरा उनके प्रिय भोग है। अमावस्या के दिन काली माता या भैरव मंदिर में जाकर उनकी प्रिय वस्तुए अर्पित है। इसके अलावा इन्हे इमरती, जलेबी और पांच तरह की मिठाइयाँ भी अर्पित की जाती है। Like and Share our Facebook Page. The post कौनसे भगवान को चढ़ता है, कौनसा प्रसाद? appeared first on Best Astrology Solution Blog. ..read more

क्या आप अपना नया घर बनाने की तैयारी कर रहे है अगर हाँ तो ध्यान रहे कि सबसे पहले घर के वास्तु पर ध्यान दे। जब वास्तु के हिसाब से घर का डिज़ाइन बनता है तो घर में हमेशा सुख, शान्ति और समृद्धि का स्वागत होता है। घर बनवाने से पहले, घर की जमीन के आकार के हिसाब से घर का नक्शा बनवा ले।  आज के लेख में हम आपको वास्तु के अनुसार घर बनाने के लिए शुभ दिशा में बनने वाले जगहों के बारे में बता रहे है। अगर कोई इंसान वास्तु के हिसाब से घर बनाता है तो घर में सुख शान्ति बनी रहती है। अगर घर बनाते समय ढंग से वास्तु का ध्यान रखा जाए तो घर में किसी भी प्रकार की कोई भी कमी नहीं आती है। सबसे पहले वास्तु में ध्यान रखने वाली बात होती है दिशा की। सबसे पहले घर की किचन, बाथरूम, बैडरूम, स्टेयर,  स्टोरेज टैंक एवं गेस्टरूम आदि के लिए सही दिशा में बनना बहुत ही जरुरी माना जाता है। घर में खुशहाली लाने के लिए जरुरी है कि वास्तु शास्त्र के हिसाब से घर बना हुआ हो। घर के ईशान कोण को देवी देवताओं का स्थान माना जाता है। इसलिए ध्यान रखे कि  इस कोण को खुला रखे और यहाँ पर मंदिर का निर्माण कराए। साथ ही साथ इस जगह पर वाटर स्टोरेज टैंक बना सकते है।घर का जो अग्नि कोण होता है उसमे किचन बनाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सदैव शांति बनी रहती है। ध्यान रहे कि घर का नेत्रत्य कोण को कभी भी खाली ना रखे। नेत्रत्य कोण पर रूफ डिज़ाइन करे क्योकि इस कोण से नकारात्मक उर्जाए देता है। घर का जो वायव्य कोण होता है उसे हवा का कोण माना जाता है और इस कोण में गेस्टरूम और बाथरूम बनाना शुभ रहता है। Like and Share our Facebook Page. The post सुख, शांति पाने के लिए घर का डिज़ाइन रखे वास्तु के अनुसार appeared first on Best Astrology Solution Blog. ..read more

मकर सक्रांति हिन्दू धर्म का बहुत ही मुख्य और पवित्र पर्व है। ऐसा माना जाता है कि मकर सक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। सूर्य के एक राशि से ही दूसरी राशि में प्रवेश करने को सक्रांति कहते है। कही कही मकर सक्रांति के पर्व को उत्तरायण भी कहा जाता है। मकर सक्रांति के दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा , दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्व है। कब है मकर सक्रांति? ज्योतिषीय गणना के हिसाब से कहा जा रहा है कि इस बार सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी की रात 02:07 बजे प्रवेश करेगा।  इसलिए सक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। मकर सक्रांति से अग्नि तत्त्व की शुरुआत होती है एवं कर्क सक्रांति से जल तत्त्व की। इसी समय सूर्य उत्तरायण होता है। इस समय किए जप और दान का फल अनंत गुना होता है। मकर सक्रांति का पर्व जिस प्रकार देश भर में अलग अलग तरीके और नाम से मनाया जाता है। उसी प्रकार खान पान में भी विविधता रहती है। इस दिन तिल का हर जगह किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता है। तिल का सेवन स्वास्थ्य  के लिए बहुत फायदेमंद होता है।मकर संक्रांति पर माघ मेले में भारी संख्‍या में साधु-संतों की भीड़ देखी जा सकती है।  इस दौरान दान करने की परंपरा को भी लोग बड़ी श्रद्धा के साथ पूरा करते हैं। कैसे मनाएं मकर संक्रांति ? सुबह तड़के स्नान करे और सूर्य को अर्ध्य दे। श्रीमदभागवद के अध्याय का पाठ या फिर गीता का पाठ करे। नए अन्न, कम्बल और घी का दान करे। भोजन में नए अन्न की खिचड़ी बनाए। भोजन को भगवान को समर्पित करके प्रसाद के रूप में ग्रहण करे। सूर्य से लाभ पाने के लिए क्या क्या करे ? लाल रंग के फूल एवं अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दे। सूर्य के बीज मंत्र का जाप करे। मंत्र होगा- “ॐ ह्रां ह्रीँ ह्रौं सः सूर्याय नमः” लाल वस्त्र, तांबे एवं गेंहू का दान करे। संध्या काल में अन्न का सेवन न करें। मकर संक्रांति पर तिल का कैसे प्रयोग करें ? सूर्य देव को तिल के दाने डालकर जल अर्पित करे। स्टील एवं लोहे के पात्र में भरकर अपने सामने रखे। फिर “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। बर्तन समेत तिल का दान करे किसी भी गरीब व्यक्ति को। इससे शनि से जुडी हुई हर पीड़ा से मुक्ति मिलेगी। Like and Share our Facebook Page. The post जाने कब पड़ रही है मकर सक्रांति, 14 या 15 जनवरी 2020 appeared first on Best Astrology Solution Blog. ..read more

As we know the eclipse is considered very important in Hinduism. According to religious beliefs, every eclipse has its good and bad ..read more

We all know that Vedic astrology is the powerful science that can able to predict the course of destiny by studying the movement and the ..read more

ज्योतिषशास्त्र में  ऐसा जाना जाता है कि घर का अलग अलग स्थान अलग अलग ग्रहों को नियंत्रित करते है। ऐसा  करने से ग्रहों के सही रंग के प्रयोग से ग्रह मजबूत होंगे। जब हम सही जगहों पर सही रंग के प्रयोग करते है तो इससे ग्रहों का संतुलन बना रहता है और सुख शांति रहेगी। इस बात से बहुत कम लोग वाकिफ है कि घर में गलत रंग के प्रयोग से ग्रह उलटे भी हो सकते है। ज्योतिषशास्त्र में  ऐसा जाना जाता है कि घर का अलग अलग स्थान अलग अलग ग्रहों को नियंत्रित करते है। ऐसा  करने से ग्रहों के सही रंग के प्रयोग से ग्रह मजबूत होंगे। जब हम सही जगहों पर सही रंग के प्रयोग करते है तो इससे ग्रहों का संतुलन बना रहता है और सुख शांति रहेगी। इस बात से बहुत कम लोग वाकिफ है कि घर में गलत रंग के प्रयोग से ग्रह उलटे भी हो सकते है। एवं बिना कारण के आप किसी भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जानिए घर में किस स्थान पर कौनसे रंग का प्रयोग करे। घर के मुख्य द्वार का रंग कैसा करना चाहिए ? जो घर का मुख्य द्वार होता है वो सूर्य से संबंध रखता है। यह ऐसी जगह है जिसका रंग लालिमा या पीलापन सा होना चाहिए। अगर कोई इस स्थान का रंग काला करता है तो यह बहुत ज्यादा नुकसानदायक होता है। यह ऐसा स्थान है जहा प्रकाश की उत्तम व्यवस्था होनी चाहिए। इस स्थान पर प्रकाश की बहुत ही उत्तम व्यवस्था होनी चाहिए। घर के लिविंग एरिया का रंग कैसा होना चाहिए ? घर के लिविंग एरिया का रंग चमकदार होना चाहिए। सफ़ेद रंग का भी प्रयोग कर सकते है। लिविंग एरिया के लिए हल्का पीला, गुलाबी और बैंगनी रंग उपयुक्त है। लिविंग एरिया में कभी भी लाल और नीले रंग का प्रयोग न करे तो अच्छा होगा। घर की रसोई का रंग कैसा होना चाहिए ? रसोई का स्थान मंगल और कुछ अर्थो में सूर्य का है। रसोई में पीला और नारंगी रंग शुभ होता है। इधर सूर्य का प्रकाश आना भी अतिआवश्यक होता है। रसोई में गाढ़े रंगो का प्रयोग नहीं करे। घर के शयनकक्ष का रंग कौनसा होना चाहिए ? घर के शयनकक्ष का स्थान शुक्र और कुछ अर्थो में शनि से संबंध रखता है। यह ऐसा स्थान है जहा ठन्डे रंगो का प्रयोग करना लाभकारी होता है। इस जगह पर हल्का गुलाबी, हल्का हरा और क्रीम रंग शुभ होता है। इस जगह का रंग लाल और नीला न करे। शयनकक्ष में हल्के प्रकाश की व्यवस्था करे। घर के बाथरूम का रंग कैसा होना चाहिए ? घर का बाथरूम राहु और केतु से संबंध रखता है। बाथरूम में जलीय रंगो का प्रयोग करना बहुत शुभ माना जाता है। यहाँ पर नीले या सफ़ेद रंग का प्रयोग करे। यहाँ पर प्रकाश की अच्छी व्यवस्था करे। पानी की बर्बादी ना करे। Like & Share our Facebook Page. The post ज्योतिषशास्त्र के हिसाब से घर का कौनसा स्थान किस रंग का होना चाहिए? appeared first on Best Astrology Solution Blog. ..read more

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